Sunday, December 30, 2018

यह बोलने वाले डब्बे से जब ये गाना सुन  रहा था तो लगा की तुकबंदी ही सही लेकिन लिखने वाले ने अच्छा ही लिखा है. बचपन की  गयी जब हिंदी के एग्जाम में लिखते थे - "कवि कहता है कि…। ". 
तो  कवि कहता है की -

Tune maari entriyan re
Dil mein baji ghantiyaan re, Tann!
Dil ki sun commentriyan re
Pyaar ki guarantiyan re, Tung!

तूने मारी एंट्रियां रे  बजी घंटियाँ रे - टन 
दिल की सुन कमेँट्रीयन रे प्यार की गारन्टियाँ रे - टंग [ घंटी की  आवाज़]

Arey taada taadi karna
Na ab nahi sudharna
Phootne laga hai re chaahaton ka jharna

अरे ताड़ा ताड़ी करना, न अब नहीं सुधारना 
फूटने लगा है, रे  चाहतों का झरना

Dil ki na marammatein hoN
Naa koi warrantiyan re, Tang!

There be no repairs of the heart,
nor any warranties, Tann!

Tune mari entriyan re
Dil mein baji ghantiyaan re, Tan!

Seeti veeti, aankhein vaankhein na yoon maaro
Phenko na chaahat ke daane
Majnoo-Ranjhe saare jhoothe hain yahaan pe
Jhoothe hain dil ke fasaane

Don't whistle, wink etc. like that,
Don't throw me grains of love.. [as in, don't entice me with promise of love]
all the lovers are fake here,
the stories of hearts are false..

chaahe to, le le tu
Wafaa ki aaj kasme-wasme
na hoon main, na hai dil
Zara bhi dekh apne bas mein, bas mein

If you so wish, you can today take from us
promises of faith, love
Neither am I there, nor the heart,
in control here at all, see for yourself..

Peechhe mere aashiqon ki
poori poori countriyan re, Tang..
maine maari entriyaan re
Dil mein baji ghantiyaan re, Tang!

Following me there are complete countries
of lovers, Tang!
When I took entries,
bells struck in the heart, Tang!

meethi meethi baatein kar ke aana chaahe
Dheere se nazdeek pyaare
Haan bhole panchhi tu na samjhe ke main kya hoon
Sholon ko samjhe tu taare

With sweet talks you want to come closer to me
slowly O dear..
O innocent bird, you don't know what I am,
You think of fireballs as stars..

jo bhi hai, jaisi hai
Meri hai jaan maine maana
jo bhi ho jaise ho
Maine hai yaar tujhko paana, paana..

Whatever you are, howsoever,
You're my life I have admitted,
However, in whatever way,
I have to get you dear..

Senti ho ke baatein bhi
Tu kar raha hai sentiyaan re, tang!

Having gone sentimental,
You're talking sentimentally too.. Tang!

maine maari entriyaan re
Dil mein baji ghantiyaan re..



Movie: Gunday
Music: Sohail Sen
Lyrics: Irshad Kamil
Singers: Bappi Lahiri, K.K., Neeti Mohan, Vishal Dadlani

Saturday, April 28, 2018

Donon hi bhagwan hain....












                                                                                        


बहुत दिनों की बात है ...वापस आ रहा हूँ कुछ प्रस्तुत करने !




                                                                                       


दोनों ही भगवन हैं..



श्री राम यथार्थ से थोड़े दूर लगते हैं ! नहीं, मैं ये नहीं कह रहा हूँ की श्री राम यथार्थ  नहीं हैं किन्तु श्री राम कलयुग देखते हुए वास्तविक नहीं लग सकते हैं ! प्रभु राम का पूरा जीवन ही आदर्श के चरम पर दिखता है !




जीवन की शुरुआत गुरुकुल में, फिर घर पहुंचते ही पुनः गुरु वशिष्ठ और ब्राह्मणों की रक्षा के लिए पुनः कठिन जीवन के लिए प्रस्तुत होना ! ये सब तब जब उन्हें गृह वापस आने पर रुकने के पुरे अवसर थे ! ये कठिन था और अभी तो कलयुग के परिप्रेक्ष्य में असंभव लगता है किन्तु प्रभु राम के लिए ये निश्चित करना ज्यादा कठिन नहीं था ! उसके बाद विवाह हुआ, गुरु की इच्छा से और क्षत्रिय धर्म के लिए उन्होंने  भाग लिया और जिस भांति उन्होंने परशुराम जी के उग्र व्यव्हार को शांति पूर्वक सुना और फिर उन्हें प्रणाम करते हुए उस रूप का दर्शन दिया, अनुभूति कराई, वो व्यवहार ही उन्हें प्रभु श्री राम बनाता है ! विवाह उपरांत घर पहुंचे और नारी-कलह ने पुनः उन्हें विस्थापित कर दिया !


श्री पिता के वचन के हेतु उन्होंने सहर्ष वन जाना स्वीकार किया, जब पिता स्वयं ही अपने वचन के लिए ग्लानि मन रहे थे ! माँ कैकेयी के बारे में उन्होंने कुछ भी बुरा नहीं सोचा और वन जाने के लिए प्रस्तुत हो गए ! धन्य हैं सीता जी जिन्होंने उनके साथ वन जाना स्वीकार किया और बिना कुछ विचार किये अपने को प्रस्तुत कर दिया. ! वो लक्ष्मण जो राम के साथ हमेशा रहे, उन्हें अवसर मिला होता की वो राजा बनें किन्तु उन्हें  वो तुच्छ लगा ! ये आदर्श प्रभु श्री राम के स्थापित किये आदर्श  से मेल खाता है !


और फिर वो श्री भरत जो श्री राम के खड़ाऊँ ले कर और तपस्वी रूप में राज्य का कार्य-भर सम्हालते हैं ! ये श्री राम के आदर्श ही थे जो श्री राम को इतने ऊँचे स्तर पर ले जाते हैं जो अविश्वसनीय हैं...








फिर श्री कृष्णा हैं....


युग बदला और छल प्रपंच जीवन में घुल मिल गया ! कंस हुए जिन्होंने अपने भांजों के जन्म पर ही त्रास दिया ! भगवन फिर आये श्री कृष्णा के रूप में ! किन्तु इस छल की दुनिया में अब सब कुछ बदल गया था ! छल के इस प्रबंध में छल का काम बढ़ा !


शेष। ..


कुल मिला कर कर्म प्रधान है , ये सीख तो मिलती ही है !

































Thursday, October 30, 2014

rim jhim gire sawan....

रिम  झिम गिरे सावन, सुलग सुलग जाये मन
भींगे आज इस मौसम में, लगी कैसी ये अगन !!

लता मंगेशकर की आवाज़ में ये ख़ूबसूरत गीत आज की दिन भर की थकन पूरी नहीं तो थोड़ी थकन तो जरूर दूर करता है. सोच रहा हूँ की आज कल के गाने और पुराने गानों  में कितना  फर्क है. और फिर ये भी  है की आज की जनरेशन कितना कुछ मिस करती होगी. कहीं  पढ़ा था की अगर क्लासिकल मुस्िक सुना जाये तो स्ट्रेस लेवल वैसे ही कंट्रोल रहता है और आज कल के गाने तो क्लासिकल मुस्िक से कोसों दूर रहते हैं.

आने वाली जनरेशन या तो  इतनी कूल होगी की उनको जरूरत ही नहीं होगी किसी भी स्ट्रेस बस्टर की। …उमॆद करता हूँ ऐसा ही हो.  वैसे तो देख रहा हूँ की कुछ नै पीढ़ी के लोग  सुन रहे हैन…और एन्जॉय भी कर रहे  हैं.

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मुझे फिर वोही याद आने लगे हैं, जिन्हें भूलने में ज़माने हैं !

सुना है हमें वो भूलने लगे हैं, तो क्या क्या हम उन्हें याद आने लगे हैं !!

कुछ  और लाइनें याद आती हैं जो गुजरे हुए ज़माने में ले जाती हैं. हरिहरन की ये ग़ज़ल पुराने ज़माने की याद हैं।  तब, जब की कैसेटस चला करते  थे और वॉकमेन हाथों में शोभा बढ़ता था.





































































Monday, October 27, 2014

Aak...cheen....Thand aa rahi hai

ठंड है की दबे पावं आना चाहती है किन्तु लोग आने नहीं देते.  ऑफिस में बैठे मैं सोच रहा था की ठंड का उदघोस लोग किस तरह से छींक  छींक कर कर दे रहेँ हैं. ठंड का मुंह छुपाना मुश्किल हो गया है और इसलिए ठण्ड थोड़ा लुक-छिप्पी के मूड में आ जाती है.

अभी दिन में थोड़ी ठण्ड बढ़ थी  तभी लोग शुरू हो गये....

आक्छ्ह्हॆऎ…।
अठान्नन्न

……

ठण्ड शर्मा गयी और  भाग ली !

उसने देखा  ऐसे ही परेशान हैं....थोड़ा छोड़  दें,बख्श दें इनको इनके हाल पर !
अच्छा लगा की ठण्ड इतना कन्सिडराते हो रही है, काश ऐसा ही होता ! लेकिंग फिर समझ  की कश्मीर की  बारिश और आंध्र के हुद हुद को  थी थोड़ा कन्सिडराते होने में.  डेवलपमेंट तो इतना वहां  भी नहीं था की इतनी तबाही  पड़े. कश्मीर के बदल क्यों रो पड़े के जहाँ देखो वहीं पानी, हुद हुद तो खैर समुसदृक्  था सो उसकी अपनी मर्ज़ि.

कुछ भी हो, ठण्ड आना मांगती है,  हर साल तो आती है तो अभी थोड़ा वेट करके बेशर्मी दिख्सती आ ही जाएगी :-)

Wednesday, October 1, 2014

Faiz by Abida.......

Continuing the contribution on the blog with Faiz's creations.
A great ghazal from the album - "Faiz by Abida" 
शाम ए फ़िराक़ अब न पूछ, आइ और आके टल गई ! Shaam-e-firaaq ab na puuchh aayii aur aake tal gayii
दिल था के फिर बहल गया, जां थी के फिर संभल गयी !! Dil thaa K phir bahal gayaa, jaaN thii K phir sambhal gaii
बज़्म इ ख्याल में तेरे हुस्न की शम्मा जल गयी ! Bazm-E-khayaal meN tere husn kii sham’aa jal gayii
दर्द का चाँद बुझ गया, हिज्र की रत ढल गयी !! Dard kaa chaaNd bujh gayaa, hijr kii raat dhal gayii

जब तुझे याद कर लिया,सुबह महक महक उठि ! Jab tujhe yaad kar liyaa, subhh mahak mahak uthii

जब तेरा ग़म जग लिया, रात मचल मचल गयी !! Jab teraa Gham jagaa liyaa, raat machal machal gayii
दिल से तो हर मुआमला, करके चले थे साफ हम ! Dil se to har mu’aamlaa karake chale the saaf ham
कहने में उनके सामने, बात बदल बदल गयी !! Kahane meN unke saamane baat badal badal gayii

आखिर इ शब के हमसफ़र, "फैज़" न जाने क्या हुए ! Aakhir-E-shab ke hamasafar ‘Faiz’ na jaane kyaa hue
रह गयी किस जगह सब्बा, सुबह किधर निकल गयी !! Rah gayii kis jagah sabaa, subha kidhar nikal gayii
~ *~*~*~ 
After quite a long time, I took shelter in "Faiz by Abida"...A magical musical creation which I was introduced by Delhi Haat, INA at one visit to the place....The loud sound @the Avadh stall - " गुल हुई जाती है। …" I was completely lost in the music. I identified that it's none other than Abida but I was not sure of the Album, after I asked about it and next day bought the CD. Few months later, I also did download through torrents which was a fashion then....:-)

I had heard of Faiz but lyrics for this album were awesome..

When I started listening again, I found other lyrics also of another ghazal which doesn't belong to the album but it's too good.

राज ए उल्फत छुप्पा के देख लिया ! Raz E ulfat chhupa ke dekh liya
दिल बहुत कुछ जला के देख लिया !! Dil bahut kuchh jala ke dekh liya
और क्या देखने को बाकी है ! Aur kya dekhne ko baaqi hai
आप से दिल लगा के देख लिया !! Aap se dil lagaa ke dekh liya
वो मेरे हो के भी मेरे ना हुये ! Wo mere ho ke bhi mere na hue
उनको अपना बना के देख लिया !! Unko apnaa bana ke dekh liya
आज उनकी नज़र में कुछ हमने ! Aj unki nazar meN kuchh hamne
सबकी नज़रें बचा के देख लिया !! Sabki nazreN bachaa ke dekh liya
आस उस दर से टूटी ही नहीं ! Aas us dar se TuTti hi nahiN
जा के देखा, ना जा के देख लिया !! Ja k dekha, na ja ke dekh liya
"फैज़" तकमील ए ग़म भी हो न सकी ! ‘Faiz’ takmil E Gham bhi ho na saki
इश्क़ को आज़मा के देख लिया !! Ishq ko aazmaa ke dekh liya
I'll be more frequent, I wish !

Thursday, January 23, 2014

Lost in politics....gain from what ?

A Kejriwal comes to rescue country known INDIA from corruption !!

Turns eyes blind to his minister and almost tried to create a "Banana republic of Delhi".

I'm MODIfied ! hardly matters what he does in Delhi until unless he can't show a "better or best governance", BJP has been already giving "good governance".

Immortals of Meluha by Amish Tripathi

Anyways, I tried completing "The Immortals of Meluha....Nagas....??" and I almost forgot the third in the line. While I found the first fabulous...second slightly dramatic and third couldn't keep me interested. For me, it needed a lot of binding than I could have.

The description and events details are too well portayed and it's chilling to read turning Lord's struggles in Meluha. The analogy created by Amish...how Lord Shiva become what he is worshiped for is a great write-up. You must get a brief about it on where else than wikipedia -

http://en.wikipedia.org/wiki/The_Immortals_of_Meluha

There are also free pdf version available as initially, there were no takers of the creation by Amish. Later, his strategy to make it available freely on web worked him miracle and the interest generated help his agent publish it.

The beauty of the creation is that it correlates to the contemporary culture and environment which may have been at that point of time. Also, there is clear link to what we see today and hence it catch your imagination in the real world. The character of Parvateshwar has been created too well. I don't know if it could be a character in mythology. Parvati is a daring, beauty who is attracted to Shiva with some face off which are slightly violent but who knows - when the survival had been so difficult, A fierce need would grow up to learn to defend oneself.

Overall, A great read...if you can keep your interest till  third of the trilogy, Great achievement ! 

Saturday, September 7, 2013

A poem by Gopal SINGH Nepali ji

य़े  मेरी कुछ मनपसंद कविताओं में से एक है,  मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता होगी की यह कविता  पाठ्यक्रम में निहित हैं !

यह लघु सरिता का बहता जल

यह लघु सरिता का बहता जल
कितना शीतल, कितना निर्मल
हिमगिरि के हिम से निकल निकल,
यह निर्मल दूध सा हिम का जल,
कर-कर निनाद कल-कल छल-छल,
तन का चंचल मन का विह्वल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।
उँचे शिखरों से उतर-उतर,
गिर-गिर, गिरि की चट्टानों पर,
कंकड़-कंकड़ पैदल चलकर,
दिन भर, रजनी भर, जीवन भर,
धोता वसुधा का अन्तस्तल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।
हिम के पत्थर वो पिघल पिघल,
बन गये धरा का वारि विमल,
सुख पाता जिससे पथिक विकलच
पी-पी कर अंजलि भर मृदुजल,
नित जलकर भी कितना शीतल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।
कितना कोमल, कितना वत्सल,
रे जननी का वह अन्तस्तल,
जिसका यह शीतल करुणा जल,
बहता रहता युग-युग अविरल,
गंगा, यमुना, सरयू निर्मल।
यह लघु सरिता का बहता जल।।

धन्यबाद 
http://www.hindisahitya.org/ और विनय कुमार जी का जिनके योगदान से यह मुझे उपलब्ध हो पाया !

Tuesday, August 21, 2012

rimjhim ke tarane le ke aayee barsat...

....रिमझिम के तराने ले के आयी बरसात ....

यही गीत बज रहा है और मैं ख्यालों में खोता जा रहा हूँ । 

एक दिवस जब बरसात आयी है काफी दिनों के बाद दिल्ली क्षेत्र में, हर कोई तरस ही रहा था इस बरसात के लिए, पर इसकी भी अपनी समस्या है । बड़े सारे जगहों  पर गाड़ियाँ ठप्प हो गयी और परिणामस्वरूप जाम लग गए थे । सुबह-2 समाचार चंनेल्स ने भी चिल्लाना शुरू कर दिया है । "Breaking News : पुरानी दिल्ली के सारे रस्ते बंद, रिंग रोड पर 3 kms का जाम ....."

चित्राक्षी उठ गयी हैं और अपनी दिव्य भाषा जो की तेते और पापापा ....जैसी शब्दावली से बनी है, बतियाने की कोशिश कर रही हैं । ऑफिस के लिए निकालने से पहले हम चित्राक्षी को प्यार करते हैं और फिर चल देता हैं। बरसात हो रही है और गाड़ी की चाल भी उसी के हिसाब से धीरे है । 

coal gate मुद्दा अभी भी गर्म बना हुआ है और जिस तरह से सरकार पुरे मुद्दे को ठन्डे बसते में डालने की कोशिश में लग गयी है, इससे जाहिर होता है कि भेण तंत्र देश के नेताओं को कितने सुगम अवसर प्रदान करता है लाखों करोरों उड़ने के लिए, ऐसे ही दिमाग में 2G  और Commonwealth घोटाले की भी प्रसारित समाचार याद आ रहे हैं। लेकिंन क्या हुआ, कुछ भी तो नहीं , कलमांदी साहब तो ओलिम्पिक  में हिंदुस्तान की तरफ से लन्दन भी घूम आये। मुझे लगता है की कोई भी पर्तिसिपंत अगर इनको वहां लन्दन में अपने इवेंट के दिन देख लेता होगा तो सोचता होगा की छोड़ो यार, क्यूँ मेहनत करना, ऐसे तो नेता हैं हमारे यहाँ जो इतने बदनामी के बाद भी शर्म नहीं करते। ना लेंगे मेडल तो क्या, ओलिम्पिक में आ तो गए ही।

बहरहाल, उन सबको बधाइयाँ है तो मेदल्स लेकर आये और उनको भी जिन्होंने अपना पूरा प्रयास किया । नहीं दे पा रहा हूँ बधाइयाँ तो उनको जो होकी की पूरी साख मिटा आये लन्दन में ।

खयालो से बहार आके सोचता हूँ की कल फिर ऑफिस जाना है ,
अभी भी वोही गीत चल रहा है।...


.....रिमझिम के तराने ले के आयी बरसात ....

शुभ रात्रि !!!

Tuesday, August 23, 2011

Anna and idiots in my INDIA......

आज अरुंधती रॉय जैसे कुछ लोगों की राय देखकर कुछ लाइनें याद आ रहीं हैं दिनकर जी की -

क्षुद्र पात्र हो, मग्न कूप से जितना जल लेता है
उससे अधिक वारी सागर भी उसे नहीं देता है !

ये लाइनें कितनी सजीवता से इस तरह की स्थिति को स्पष्ट कर देती हैं. इस तरह के हर किसी की सोच के बारे में सोच कर तरस से ज्यादा कुछ नहीं आता. एक महापुरुष जिसने पिछले २० वर्षों में  इस देश और प्रदेश के लिए इतना कुछ किया है. Right of Information से लेकर कुछ और अहम् मुद्दों पर अन्ना ने जितना योगदान किया है, उसके बारे में लोगों को जानने की जरूरत है. कैसे बनी होगी कपिल सिब्बल की ये मानसिकता जब उन्होंने कहा -

"अन्ना को टीवी पर अपने आप को दिखने के लिए  ये आन्दोलन का नाटक है"
अब ऐसे मामले में कपिल सिब्बल की समझदारी कुछ और बड़े मतलबों से दबी रह गयी तो क्या ये अरुंधती रॉय जैसों को नहीं समझ में आ रहा.

ये एक ही मामला नहीं था, इसके बाद एक और कांग्रेस के नेता ने बहुत ही नीचता से कुछ बयान दिए -

"भ्रस्टाचार की लड़ाई की बात करने वाले अन्ना....तुम तो खुद ही सर से पांव तक भ्रस्टाचार में लिप्त हो"

इस नेता, जिसका नाम मनीष तिवारी है ने ये भी कहा कि अन्ना सेना छोड़ के भागे थे...कितना शर्मनाक है इस नेता का व्यवहार और यह जल्दी ही सिद्ध हो गया जब एक RTI के जवाब में ये सारे आरोप से सेना ने अन्ना को बरी कर दिया. इस दुष्ट प्रकृति नेता ने कभी भी क्षमा नहीं मांगी जो कि सिद्ध करता है कि यह बहुत ही दोयम दर्जे के इन्सान(?) हैं.
कितना दुखद था ये, कैसी होगी वो मां जिसने ऐसे अभागे को जन्म दिया. मन लें कि संस्कार और बड़े छोटे के अंतर को आज कल के लोग भूल गए हों लेकिन फिर भी ऐसे बयानबाजी पर तो इस बेशर्म इन्सान(?) को धिक्कार है.

उसके बाद भी बहुत सारे कांग्रेस के नेताओं ने बेशर्मी दिखाने कि कोशिश कि मसलन दिग्विजय सिंह, अभिषेक मनु सिंघवी और बेशर्म कपिल सिब्बल |

असल में बात जो समझ में आती है वो ये है कि जो कुछ पढ़े लिखे और स्वार्थ में अंधे लोग हैं इनको वो अन्ना जो कि ८ दिन से अनशन पर बैठे  हैं और पहले भी देश और प्रदेश कि भलाई के लिए अनशन कर चुके हैं, वो स्वार्थ परक दिख सकते हैं. इनकी समझदानी इतनी छोटी हो सकती है, ये आश्चर्यजनक किन्तु सत्य है और इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता. कोई भी अच्छे से पढ़ा इन्सान इस बात को क्यूँ नहीं समझ सकता कि अन्ना दूसरे गाँधी या कुछ बड़े हैं जो इतना बड़ा संघर्ष कर रहे हैं. अभी भी अगर कुछ समझ्दानियाँ छोटी हैं, भगवन ! इनकी समझदानी को बढ़ाये और अगर ये भगवन को नहीं मानते (जैसा कि प्रायः देखा जाता है) तो ये इस ज़िन्दगी में कुछ अच्छा सोच नहीं सकते.  भगवन इनके अगले जन्म में इन्हें थोड़ी बड़ी समझदानी दें !

अन्ना संघर्ष करो !
हम तुम्हारे साथ हैं !!

अब तो ये स्पष्ट है !
कांग्रेस आई भ्रष्ट है !!

Sunday, June 12, 2011

Vinash kale viprit budhhi......

अन्ना के सामने कांग्रेस पार्टी और सर्कार बेबस तो दिख रही है लेकिन फिर भी सरकार का रवैया अजीब सा है. बहुत कुछ परोक्छ होते हुए भी और सरकार बेबसी में भी कदा रुख अपनाने की कोशिश कर रही है....साढ़े हुए राजनीतिज्ञ जो की परिस्थितियों को अच्छे से कण्ट्रोल कर सकते थे, शांत रहे हैं और कुक उदंड लोगों ने परिस्थितियों को सम्हालने की कोशिश की है. जिस तरीके से कांग्रेस ने बाबा रामदेव के अनशन को भंग किया, वो तो सरकार के दिवालियेपन की पराकाष्ठा को प्रदर्शित करता है और साथ में ये भी स्पष्ट होता है की सरकार में कुछ लोगों ने नहीं बल्कि मामला कुछ और लोगों ने सम्हाला है जिनकी परिपक्वता पर सवाल खड़े होते हैं. मुझे तो प्रतीत होता है की यह सोनिया जैसे लोगों की शाह पर कपिल सिब्बल और दिग्विजय सिंह जैसे लोगों ने परिस्थितियों को बिगाड़ा है.

अभी तो यही लगता है की सरकार "विनाश काले विपरीत बुध्धि" वाले कहावत को चरितार्थ कर रही है. देश का दुर्भाग्य है की बाबा रामदेव और अन्ना हजारे जैसे महा पुरुष जिन्होंने कई मौकों पर सिद्ध किया है की वो लोग देश हित में समर्पित है, प्रश्न चिन्ह लगाये जा रहे हैं.

Friday, July 16, 2010

Eye of the needle

A fabulous read after quite some time by Ken Follet....It's about a german spy Die Nadel who if existed, was very near to let Germany win the World War II. He did a great job...collecting proofs of the biggest English bluff army/airforce base in a particular region of Britain, he made all his effort to let it be handed to Feuhror. He almost made it...but lost the last battle and loved a british women who is good to her till the moment, she didn't know if he is a German.

Overall a great novel to read....


More ....

http://en.wikipedia.org/wiki/Eye_of_the_Needle

Thursday, July 1, 2010

Lapataganj.....

अभी सब टीवी पर लापतागंज सीरियल, जो १०:०० बजे शाम को शुरू होता है...एक बहुत ही ताज़गी भरा प्रोग्राम है. समाज कि मध्य वर्ग के जीवन में खुशियाँ छोटी छोटी चीज़ों से किस तरह से पाई जा सकती हैं...इसका एक बहुत ही अच्चा चित्रण इस सीरियल में करा गया है.
बिजी पांडेय और गुड्डू कि जोड़ी तो बहुत ही अच्छा और मनोरंजक उदाहरण है मध्य वर्गीय समाज के युवकों को चित्रित करता हुआ जो शायद थोड़े व्यस्त हैं अपनी सपनों कि दुनिया में. उनके सपने बहुत बड़े नहीं हैं, बस कुछ चंद हज़ार रुपये और "सुरीली" कि उनके जीवन में उपस्थिति ही उनको भूँकने से लेकर एक अच्छा इन्सान बनाने को प्रेरित करती है.
शेष .....

Saturday, January 30, 2010

सुन्दरकाण्ड का पाठ वैसे तो बहुत ही सुखदाई होता है परन्तु अगर यह एक अच्छे लय में सुनाने को मिले तो उससे अच्चा कुछ भी नहीं. आज भी ऐसा हुआ कि हमें नॉएडा से आने में देर हो गयी और रत का भोजन भी करना था तो खुशबू ने खाना बनाया और परोसने तक बारह बज गए. अब खाने के बाद भी थोडा बैठना जरूरी था. अब हमने संस्कार चैनल लगा दिया और उसपे श्री केसरी नंदन सत्संग समिति के पंडित जी सुन्दरकाण्ड पाठ कर रहे थे.....ये बहुत ही आनंददायी था. हुम्सुनाने लगे और काफी देर तक सुनते रहते. खुशबू को भी यह काफी पसंद आया. इनजा सुन्दरकाण्ड पाठ बहुत ही लय में और बहुत ही अच्छे से उच्चारित है जो बहुत ही उत्तम है.

इस बीच मुझे एक साईट मिली जिस पैर बहुत सरे भजन और आरती हैं....साथ में सुन्दरकाण्ड का भी mp3 है.

http://www.hanumanchalisa.org/mp3/

एक दूसरा mp3 का भी link यहाँ पैर ही सुना जाकता है...

Shree Hanuman Amritvani-01-Sunder Kand .mp3
Found at bee mp3 search engine
उम्मीद है कि आप सब भी इसका लाभ उठा पायें.

जय श्री राम !
राम राम जय जय राम सिया राम !

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Sunday, November 15, 2009

Neta ji Kahin....

यह मनोहर श्याम जोशी जी की एक अच्छी पुस्तक है. व्यंगात्मक शैली मैं लिखी गयी इस पुस्तक के नायक नेता जी का चरित्र तो प्रचंड है :-) एक छुटभैये नेता होते हुए भी उनका रुतबा और उस पर से आत्म विश्वास ... कुछ भी कर गु़जरने का बहुत ही अच्चे तरीके से उभरा हुआ है. कई जगह पर तो उनके कथन इतने अच्छे हैं की हंसते हंसते आप के पेट में बल पड़ जाएँ और कई जगह पर ये कटाक्ष डेमोक्रेसी में दुर्व्यवस्था को बड़े अच्छे से उभारते हैं.एक उदहारण के तौर पर....

"गाँव दिहात में कहितें हैं की जिसकी जीभ चलती हय, उसके नऊ बिगहा खेत में हल चलिता हय.
वियापी हइये वोही जिसके एकही अंग को कष्ट देना पड़ता हय - जीभ को !"

और भी ऐसे कई वाकये हैं जो बहुत ही अच्छे से प्रस्तुत किये गए हैं.

इस पुस्तक को हलके फुल्के पल में पढ़ना बहुत ही आनंददायक होगा.


एक परेशानी थोडा सा होती है जब अंग्रेजी के शब्दों को जोशी जी ने हिन्दी में लिखा है....वो थोडा क्लिष्ठ हो जाते हैं....और कुछ जगहों पर जिस तरह से उनका संधि विच्छेद कर के लिखा हुआ है...पढ़ने में थोडा असुविधा होती है...वैसे तो उस चीज़ को किस तरह से बोला जाता है....उसीको प्रस्तुत करने की कोशिश अच्छी है.

http://en.wikipedia.org/wiki/Manohar_Shyam_Joshi

http://en.girgit.chitthajagat.in/rachanakar.blogspot.com/2008/06/blog-post_20.html

Thursday, October 29, 2009

RashmiRathi - by Dinkar

रश्मिरथी, रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित एक ऐसा काव्य जो दिल दिमाग को छु जाये. अभी पिछले ही हफ्ते हम बनारस से आ रहे थे तो मैंने यह पुस्तक ली हुई थी और पढ़ रहे थे. थोडी देर बाद हमें थोडा झपकी सी आ गयी तो एक महानुभाव जो कि बगल में बैठे थे, उन्होंने ये पुस्तक ले ली. दिनकर जी द्वारा रचित यह एक ऐसा काव्य है, जो किसी को भी बांध ले...और यही हुआ. ये साहब ऐसे चिपके कि इन्होने इस बात का भी ख्याल नहीं किया कि मैं इस पुस्तक को पढ़ रहा था. यद्यपि कि यह पुस्तक बहुत छोटी है, लेकिन जब रस ले कर इसे पढ़ा जाये तो थोडा समय लगाना तो स्वाभाविक है.
कुछ अंश मैं यहाँ भी प्रस्तुत करता हूँ....उसके बाद बताऊंगा कि इन महानुभाव ने मुझे पुस्तक वापस कर दी कि नहीं....:-)

यह काव्य मुख्यतः कर्ण के चरित्र कि ऊँचाइयों को चित्रित करता है. कर्ण का जीवन संघर्षों से भरा हुआ था और इसका कारन उसका जन्मतः क्षत्रिय परन्तु लालन पालन सूतपुत्र कि तरह से होने के कारन था. कर्ण एक समय अर्जुन जैसे धनुर्धर के लिए भी भय सिद्ध होता है और गुरु द्रोणाचार्य इस बात से भयभीत रहते हैं...कि उनका अर्जुन को सबसे बड़ा धनुर्धर बनाने का प्रयत्न गलत हो जाता. भगवन कृष्ण भी एक आवसर पर कर्ण को दुर्योधन को छोड़ने को कहते हैं. कर्ण का व्रत अब तो दुर्योधन के साथ रहने का हो गया होता है....अतः वो भगवन कृष्ण को विनयपूर्वक मन कर देता है. यह प्रकरण अत्यंत ही संवेदना से भरा हुआ है. कर्ण के चरित्र का दूसरा पहलू दानवीर का है और इन्द्र को बहुत क्षुद्रता का अहसास होता है....जब कर्ण उनको कंवाच और कुंडल भी दान में दे देता है....मांगने पर. (इन्द्र का एक दूसरा बहुत ही ख़राब रूप दीक्षा - नरेन्द्र कोहली कि पुस्तक में भी था). एक दूसरे स्थान पर कुंती भी दान में अक्षय मांग लेती हैं...कर्ण कहता है....कि अगर अर्जुन कर्ण पर विजयी होता है तो ५ के ५ रहेंगे...अन्यथा अगर कर्ण अर्जुन पर विजय पायेगा तो उस दिन एक इतिहास रचेगा और पांडवों के पास आ जायेगा. इस तरह से कुंतइ ५ कि माता बनी रहेगी. कुछ और भी बहुत ही अच्छे उद्धरण हैं जो कि पढ़ने में बहुत आनंद देते हैं.

शुरू में ही युध(war) के बारे में कुछ पंक्तियाँ -


रण केवल इस लिए कि राजे और सुखी हों मानी हों, 
     और प्रजाएँ मिलें उन्हें वो और अधिक अभिमानी हों !
रण केवल इस लिए कि वो कल्पित अभाव से छूट सकें,
     बढ़ें राज्य कि सीमा और वो अधिक जनों को लूट सकें ||

ये पंक्तियाँ आज भी उतनी ही सच प्रस्तुत करतीं हैं जितना महाभारत के समय पर.
कुछ और पंक्तियाँ जो मुझे कार्य स्थल पर, या दैनिक जीवन में कहीं भी स्वाभाविक ही दिखतीं हैं....

क्षुद्र पात्र हो मग्न कूप से जितना जल लेता है
    उससे अधिक वारी सागर भी उसे नहीं देता है |

ऐसी ही अनेक पंक्तियाँ हैं जो मन को बहुत भातीं हैं.


रश्मिरथी - On Wikipedia

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Tuesday, October 27, 2009

Narendra Kohli - Deeksha

अभी हमें नरेन्द्र कोहली के साहित्य को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ. इन्होने रामायण के मानवीकरण भावः को कुछ पुस्तकों में बहुत ही उत्तम ढंग से प्रस्तुत पिया है. पहला भाग, जो कि दीक्षा के नाम से प्रकाशित है, मैंने अभी छुट्टियों में पढ़ा. यह मूलतः राम के युवावस्था कि कहानी है...जब राक्षसों से ट्रस्ट हो कर गुरु विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को अयोध्या से ले आये और उनको अस्त्र-शस्त्र कि शिक्षा दी.
इस प्रसंग में नरेन्द्र जी जब दशरथ के व्यक्तित्व के बारे में लिखते हैं...तो वह थोडा कलयुग से प्रभावित मानवीकरण लगता है. दशरथ का चरित्र रामायण में ऊँचा मन गया है...लेकिन इस पुस्तक में यह इतना अछछा नहीं दर्शाया गया है. राम और लक्ष्मन का चरित्र बहुत ही बारीकी से प्रस्तुत किया गया है....जो कि वस्तुतः सराहनीय है.
यह पुस्तक बहुत ही रोचक हो जाती है...जब गौतम-अहिल्या प्रसंग आता है. इतना जीवंत छत्रं मैंने अपने याद में किसी भी उपन्याश में नहीं पढ़ा था. इन्द्र के द्वारा अहल्या का शील हरण और उसके बाद केवल एक आक्षेप से अहिल्या के जीवन को नष्ट कर देने का सफल प्रयास बहुत ही दारुण है और आपको आज के युग में भी नारी कि दुर्दशा के बारे में बहुत कुछ बता जाता है.  पश्चात् इसके, गौतम  का असमंजस और एक निर्णय पर पहुंचना बहुत ही रोचक है. श्राप के असर के बारे में लेखक के विचार बहुत श्रेष्ठ हैं .. मसलन कि ऋषि का श्राप तभी असरदार होगा जब रजा उनके साथ हो औत वोही निश्चित करें कि श्राप का पालन हो. गौतम इन्द्र को श्राप देते हैं कि अब किसी भी यज्ञ-अनुष्टान में इस्द्र कि पूजा नहीं होगी और जनक इस बात को फलीभूत करने का वचन देतें हैं.
एक शापित जीवन व्यतीत कर रही अहिल्या का उधर भगवन श्री राम करते हैं....उन्हें पूरा सम्मान देकर...श्री राम को एक पुरुष रूप में प्रस्तुत किया गया है...जो निर्भीक हैं, चरित्र वाले हैं और नारी को अछिछी तरह से समझते हैं.
यह एक ऐसी पुस्तक है जो हर किसी को एक बार अवश्य पढ़नी चाहिए.

नरेन्द्र कोहली - Wikipedia

Wednesday, October 7, 2009

Shekhar - Ek Jeevani....Agyeya

Sachidanand Hiranan Vatsyayan "Agyeya" यह नाम हिंदी साहित्य का बहुत सुप्रसिद्ध नाम है | बचपन में उनकी कुछ कवितायेँ पढ़ी थी...जो प्रायः शिक्षक लोगों को भी नहीं समझ में आती थीं तो हमारे लिए तो मुश्किलें थोडी ज्यादा ही होती थीं. वह संघर्ष अच्चा होता था...जब ऐसे किसी साहित्यकार के दर्शन को परीक्षा में पास होने के लिए पढ़ लेते थे |
कुछ वर्ष पश्चात मुझे एक अवसर मिला जब मैंने अज्ञेय जी की "शेखर - एक जीवनी" पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ | इसके २ खंड थे और मैंने पहलखंड पढ़ना शुरू किया था | यस एक बच्चे की कहानी थी जो कई सरे भाई बहनों में उपेक्षित था | इस बच्चे का बाल्य काल और इसकी सोच को बहुत ही उत्तम तरीके से प्रस्तुत किया गया था | शेखर का शुरूआती जीवन और भाई बहनों में दब गया था और एक उपेक्षित बाल्य काल में शेखर की अपनी अनुभूतिया कुछ इस तरह से लिखा गया है ... कि पढ़ते समय आप मुग्ध हो जायेंगे | शेखर कि यह सिद्ध करने कि जिद कि मैं भी हूँ और उसके लिए एक अपने आपको कुछ भी करने के लिए प्रस्तुत रहना, बहुत अच्छी तरीके से लिखा गया है | एक वाकया जिसमें कि शेखर को यह लगता है कि वह किसी बीमारी से ग्रस्त है...और एन्स्य्क्लोपेडिया में इस बीमारी को खोजना .... शेखर एक एक करके सारी बिमारियों का लक्षण देख रहा है और उसको काफी कुछ उसके अपने बीमारी के लक्षणों से मिलाता जुलता लगता है | जब वो अंतिम बीमारी तक पहुंचता है तो इस बीमारी में व्यक्ति को ये लगता है कि वो और सारी बिमारियों, जो उसने अभी तक पढीं, उन सबसे पीड़ित है | इस तरह के और कई सरे वाकये हैं जो इस साहित्य कृति को उत्कृष्ट बनाते हैं |

आज कि तारीख में यह साहित्य मिलाना शायद मुश्किल हो....लेकिन अगर मिले तो अवश्य पढें |

अन्य :

अज्ञेय - on Wikipedia
आप यहाँ खरीद सकते हैं |

Monday, September 28, 2009

मैं अभी राग दरबारी पढ़ रहा था..जो की श्री लाल शुक्ल के द्वारा लिखित है| यह उपन्यास मुझे विवेक उपाध्याय से प्राप्त हुई..जो उनके एक सम्बन्धी ने उनको भेंट दी थी...चूँकि मेरा इंटेरेस्ट है तो मैंने उनसे यह पुस्तक ले कर पढ़ने के बारे में सोचा | आज जब यह उपन्यास ख़तम हुआ तो फिर मैंने सोचा की मुझे इसके बारे में कुछ लिखना चाहिए.

वैसे देखा जाये तो यह उपन्यास थोडा पुराने परिप्रेक्ष्य में लिखी गई है और वैसे भी श्री लाल शुक्ल जी ने इसे १९७० के आस पास लिखा है | पुस्तक शुरू होती है...एक पात्र रंगनाथ से जो अपने मामा जी के यहाँ शिवपाल गंज जा रहे हैं....इनके मामा जी वहां के मठाधीश हैं और जिस तरह से उन्होंने गाँव में समाज सेवा के नाम पर सब कुछ अपनी मुठ्ठी में बंद कर रखा है, उसका व्याख्यान लेखक ने बड़े ही अच्चे ढंग से प्रस्तुत किया है. बीच बीच में लेखक ने जो व्यंग प्रस्तुत किये हैं...वोह तो अति उत्तम हैं. कुल मिला के मैं इसके बारे में कहूँगा की प्रत्येक किसी को यह पुस्तक पढ़नी चाहिए |

अभी मैं आगे श्री हरि शंकर परसाई जी के व्यंग के बारे में लिखूंगा...उम्मीद है कुछ पढ़ने वाले लोग उससे कुछ लाभ उठा पाएंगे और उत्साह वर्धन करेंगे ||

My literature....

I have been avid reader for 2-3 years..and almost read 2-3 novels at a time including English, Hindi...especially weekends used to be comparatively better for the task and I enjoyed reading. sipping self made tea. In the winters, it used to be a great feeling, sitting in balcony of C-127, First floor, Sector 19, Noida...in sun with a novel. At times, There used to be someone...maid...or cook who prepared tea for me...or else I used to prepare for myself.

Here, a list of novels, literature (Hindi, English...) I have read over a period -


Name/Title
Genre
Author
Short Description/Review
Atlas Shrugged
Philosophical novel, Science Fiction
Ayn Rand
One of the greatest read, I ever had...probably I may ever had. A powerful railroad executive, Dagny Taggart, struggles to keep her business alive while society is crumbling around her. On WikiPedia
An Equal Music
Novel
Vikram Seth
An intense love story, I swam across it almost down the water. Initial 50 odd pages were not good and with all due work pressure, I couldn't give much time and once I lost the track even. After 3-4 days, I again started it...music and love was in the air and I was never tired reading it further. At one point of time, I felt like I couldn't give much time to my work...Great novel.
Complete Review
The Last Don
Novel, Fiction
Mario Puzo
I read this when I was in college...I couldn't manage to get Godfather but came across an old copy of The Last Don. I found it terrific. Once started, I just read it completely. Review


....Much more to be published.....:-)